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ग्रामीण क्षेत्र की 40 किशोरी बालिकाओं ने सीखा हाथ का हुनर

चेतनराम
18-01-2019 16:05

ग्रामीण क्षेत्र की 40 किशोरी बालिकाओं ने सीखा हाथ का हुनर


किसना पुत्री चेतनराम जाट स्वरूपसर, नोखा आज स्वयं अपने कपड़े सिलाई करने के साथ परिवारजनों के कपड़े सिलाई करने लगी है और उसमें बोलने व बात करने की हिम्मत आई है । किसना सरकारी योजनाओं की काफी जानकारी रखती है और अपनी उम्र की अन्य ग्रामीण किशोरी बालिकाओं से ज्यादा जानती है। किसना में यह बदलाव मात्र 45 दिन के उरमूल ज्योति संस्थान ़द्वारा संचालित आवासीय कौशल विकास शिविर के माध्यम से आये है। किसना के साथ ऐसी ही 40 से ज्यादा ग्रामीण समुदाय की बालिकाओं ने 9 दिसंबर 2018 से लेकर संचालित शिविर में अपने आप को तरासकर हाथ का हुनर सीखा है। इस शिविर में आकर सभी बालिकाओं ने सिलाई के साथ-साथ प्राथमिक स्वास्थ्य, बालिका से महिला सफर, कुपोषण के कारण व निवारण, खान-पान, बोल-चाल व रहन-सहन का तरीका सीखना, सरकार द्वारा संचालित महिला विकास योजनाओं की काफी जानकारी ली है और अपना ज्ञान बढाया है।


आज ये सभी बालिकाएं मुकाम से बस द्वारा उरमूल ज्योति संस्थान नोखा आई और संस्थान द्वारा संचालित ज्योति नेत्र चिकित्सालय एवं संस्थान केम्पस का अवलोकन किया और अपने अनुभव संस्थान साथियों को बताये। उरमूल ज्योति संस्थान हर वर्ष 100 बालिकाओं के हाथ हुनर विकसति करने में सहयोग करता है। आज संस्थान की वरिष्ठ महिला साथी कार्मिक कमला गोदारा ने इन बालिकाओं को सस्थान की गतिविधियों की जानकारी दी।


उरमूल ज्योति संस्थान की तरफ से चेतनराम गोदारा ने इन बालिकाओं के साथ बात करते हुए कहा कि आगे बढने के लिए हाथ का हुनर जरूरी है और अब आप सिलाई सीख चुकी है तो इसे काम में लेना है और स्वयं के कपड़े सिलाई करने के साथ-2 इसको आयवर्धन का जरीया बनाने का प्रयास करना है। आपने महिला विकास व बालिका षिक्षा में संस्थान द्वारा किये जा रहे काम के बारे बताया और उज्जवल भविष्य की कामना करते हुए अपने हक व अधिकार के प्रति सचेत रहने का आवाहान किया।


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